परिचय

मातृवाणी—अम्मा की वाणी—माता अमृतानन्दमयी मठ का प्रमुख प्रकाशन है।

 

सन् 1984 में,अम्मा के प्राकट्य—दिवस के शुभावसर पर,भक्तजनों तक अम्मा की शिक्षाएं पहुँचाने हेतु,पहली बार प्रकाशित हुई मातृवाणी को आज दुनियां भर के लाखों लोग पढ़ते हैं।

 

सदस्यता दर अब बढ़ कर दुनियाँ के सभी महाद्वीपों तक फ़ैल गई है जोकि विश्व भर में अम्मा के दिन—प्रतिदिन बढ़ते श्रद्धा—सम्मान का परिचायक है।

 

पत्रिका के प्रति बढ़ते आकर्षण का रहस्य स्वयं अम्मा हैं। निःस्वार्थ प्रेम एवं करुणा की मूर्तरूप अम्मा की शिक्षाएं बेहद सीधी—सरल एवं पवित्र, गम्भीर और विश्वव्यापी तथा प्रासंगिक व कालातीत हैं।

 

ये सब शिक्षाएं सादर संजोने के साथ—साथ,मातृवाणी अपने पन्नों में भक्तिभाव से ओतप्रोत अनुभव, स्मृतियाँ व लेख भी ले कर आती है। प्रत्येक अंक में अम्मा की विश्व भर की यात्राओं के समाचार शामिल होते हैं तथा मठ द्वारा संचालित विशाल लोकोपकारी तन्त्र की गतिविधियों से भी अवगत कराया जाता है।

 

इस समय मातृवाणी १७ भाषाओँ में प्रकाशित की जाती है जिसमें ९ भारतीय मूल की भाषाओँ (मलयालम, तमिल, कन्नड़, तेलुगु, हिन्दी, मराठी, गुजराती, बंगाली व उड़िया) तथा ८ विदेशी भाषाओँ (अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, जर्मन, स्पैनिश, इटैलियन, फ़िन्निश, जापानी) में हैं।

 

गत तीन दशकों से इस ईश्वरीय सन्देशवाहिनी पत्रिका का सामयिक एवं भावी मूल्य आँकना कठिन है। यहाँ हम आपके लिए मातृवाणी के कुछ पुराने अंक प्रस्तुत कर रहे हैं। हमारी कामना कि यह ईश्वरीय वाणी आपकी ऊर्ध्वगति सहायी हो!